भारती एंटरप्राइजेज और हायर इंडिया की डील के पीछे की सबसे बड़ी वजह ‘प्रेस नोट 3’ (PN3) है। आइए समझते हैं कि यह नियम क्या है और इस सौदे ने कैसे एक कानूनी बाधा को अवसर में बदल दिया

प्रेस नोट 3 (PN3) क्या है?

भारत सरकार ने अप्रैल 2020 में (कोविड-19 महामारी के दौरान) FDI नीति में एक बड़ा बदलाव किया था, जिसे ‘प्रेस नोट 3’ कहा जाता है।

  • मुख्य नियम: भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों (जैसे चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि) से आने वाले किसी भी विदेशी निवेश (FDI) के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी (Prior Approval) अनिवार्य है।
  • उद्देश्य: इसका मकसद महामारी के कारण कमजोर हुई भारतीय कंपनियों के ‘अवसरवादी अधिग्रहण’ (Opportunistic Takeovers) को रोकना था।
  • असर: चूंकि हायर (Haier) एक चीनी मूल की कंपनी है, इसलिए उसे भारत में अपना नया प्लांट लगाने या किसी भी तरह के बड़े फंड निवेश के लिए महीनों या सालों तक सरकारी मंजूरी का इंतजार करना पड़ रहा था।

इस डील ने कानूनी समस्या को कैसे सुलझाया?

हायर इंडिया को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग ₹1,000 करोड़ के निवेश की जरूरत थी, जो PN3 की वजह से अटका हुआ था। भारती और वॉरबर्ग पिंकस के साथ इस सौदे ने खेल बदल दिया:

  1. भारतीय नियंत्रण (Indian Control): भारती एंटरप्राइजेज एक प्रतिष्ठित भारतीय समूह है। जब कोई भारतीय पार्टनर कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी (49%) खरीदता है, तो कंपनी की संरचना ‘विदेशी’ से ‘संयुक्त उद्यम’ (Joint Venture) में बदल जाती है।
  2. मंजूरी का रास्ता आसान: भारती के आने से अब कंपनी के विस्तार प्रस्तावों को सुरक्षा और आर्थिक दृष्टिकोण से अधिक तेजी से मंजूरी मिलने की संभावना है।
  3. स्थानीय प्रबंधन: इस डील के तहत कंपनी का प्रबंधन भी ‘लोकल’ हो जाएगा, जिससे सरकार का भरोसा बढ़ेगा।

क्या PN3 के नियमों में ढील मिल रही है?

हालिया रिपोर्ट्स और इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 के अनुसार, भारत सरकार अब चीन से आने वाले निवेश के प्रति सॉफ्ट स्टैंड (Softer Stance) अपना रही है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनना है।

  • चयनित मंजूरी: इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में जहां ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना है, वहां अब केस-टू-केस आधार पर मंजूरियां दी जा रही हैं।
  • नया प्रस्ताव: हाल ही में चर्चा हुई है कि 10% तक के चीनी निवेश को ‘ऑटोमैटिक रूट’ से मंजूरी दी जा सकती है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है।

महत्वपूर्ण तथ्य: हायर इंडिया ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में अपने राजस्व को ₹3,500 करोड़ से बढ़ाकर ₹8,000 करोड़ के पार पहुँचाया है, और यह डील इसे ₹15,000 करोड़ के क्लब में शामिल करने का रास्ता साफ करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *