साल 2025 सोने और चांदी के निवेशकों के लिए एक अभूतपूर्व वर्ष रहा है, जहाँ दोनों धातुओं की कीमतों में रिकॉर्ड-तोड़ वृद्धि देखी गई है। चांदी की कीमतों में 150% से अधिक का उछाल आया, जबकि सोने ने भी लगभग 80% की शानदार बढ़त हासिल की, जिससे निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न मिला।
मूल्य प्रदर्शन (Price Performance)
- सोना: भारत में, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,39,216 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है।
- चांदी: चांदी की कीमतों ने ₹2 लाख प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार कर लिया है, जो कि ₹2,74,000 प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर कारोबार कर रही है(27.12.2025)
यह वृद्धि मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मजबूत औद्योगिक मांग, और केंद्रीय बैंकों की नीतियों जैसे कई कारकों के कारण हुई है।
प्रमुख अंतर्दृष्टि (Key Insights)
2025 में सोने और चांदी की कीमतों में यह उछाल कई महत्वपूर्ण वैश्विक और घरेलू कारकों का परिणाम है:
- चांदी का बेहतर प्रदर्शन: औद्योगिक मांग में भारी वृद्धि, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और सौर ऊर्जा क्षेत्रों से, ने चांदी को सोने से बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की है।
- सुरक्षित निवेश की मांग: भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने निवेशकों को सोने और चांदी जैसे सुरक्षित-स्वर्ग (safe-haven) परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित किया है।
- केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने, भारत के RBI सहित, अपने भंडार में सोने का संचय जारी रखा है, जिससे कीमतों को समर्थन मिला है।
मूल्य वृद्धि के मुख्य कारण (Main Reasons for Price Rise)
सोने और चांदी की कीमतों में इस महत्वपूर्ण उछाल के पीछे पाँच प्रमुख कारण हैं:
- मजबूत औद्योगिक मांग: चांदी की वैश्विक मांग का लगभग 55-60% हिस्सा उद्योगों से आता है, जिसमें सौर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV निर्माण शामिल हैं। इन क्षेत्रों में तेजी से विकास ने मांग को बढ़ाया है।
- आपूर्ति में कमी (Tight Supply): वैश्विक चांदी बाजार लगातार चार वर्षों से घाटे में चल रहा है, जिससे बाजार में भौतिक चांदी की कमी हो गई है और कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव पड़ा है।
- फेडरल रिजर्व की दर में कटौती: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष 2025 में तीन बार ब्याज दरों में कटौती (कुल 0.75%) ने गैर-उपज वाली संपत्तियों जैसे सोने और चांदी को और अधिक आकर्षक बना दिया है।
- भू-राजनीतिक अनिश्चितता: वैश्विक संघर्षों, व्यापार युद्धों और आर्थिक स्थिरता पर चिंताओं ने निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की तलाश करने पर मजबूर किया है।
- FOMO (Fear of Missing Out) चालित खरीदारी: जैसे-जैसे कीमतें बढ़ीं, खुदरा निवेशकों में “कुछ छूट जाने के डर” (FOMO) ने भी प्रवेश किया, जिससे रैली को और गति मिली।
भारतीय बाजार पर प्रभाव (Impact on Indian Market)
भारत में, वैश्विक रुझानों के अलावा, रुपये का कमजोर होना और त्योहारी व शादी-विवाह का सीजन भी कीमतों को प्रभावित करता है। रुपये के मूल्यह्रास ने सोने-चांदी के आयात की लागत बढ़ा दी, जिससे घरेलू कीमतें और चढ़ गईं।
आगे की राह (Outlook)
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुद्रास्फीति अधिक रहती है, अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की मांग बढ़ती है, तो सोने और चांदी में तेजी जारी रह सकती है। विश्लेषकों ने निवेशकों को “गिरावट पर खरीदें” (buy-on-dips) की रणनीति अपनाने की सलाह दी है, क्योंकि दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है।
