उत्तर भारत में बढ़ते कोहरे और गिरती दृश्यता (Visibility) को देखते हुए सरकार के परिवहन विभाग ने वाहन चालकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा परामर्श (Advisory) जारी किया है। विभाग ने सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ‘सुरक्षित ड्राइविंग’ के आठ सुनहरे नियम बताए हैं।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि “कोहरे में हाई बीम नहीं, लो बीम ही आपकी सुरक्षा की कुंजी है।”
सुरक्षित सफर के लिए इन नियमों का करें पालन:
सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- लाइट का सही प्रयोग: कोहरे के दौरान हमेशा लो बीम हेडलाइट्स का ही प्रयोग करें। इसके साथ ही गाड़ी की हेडलाइट या फॉग लैंप को हमेशा जलाकर रखें।
- रफ्तार पर नियंत्रण: वाहन की गति धीमी रखें। कोहरे में सड़क साफ न दिखने के कारण तेज रफ्तार जानलेवा साबित हो सकती है।
- ओवरटेक से बचें: कम दृश्यता में ओवरटेक करना दुर्घटना को दावत देना है, इसलिए इससे पूरी तरह बचें।
- सुरक्षित दूरी: सड़कों पर चल रहे अन्य वाहनों के बीच पर्याप्त सुरक्षित दूरी बनाए रखें ताकि आपातकालीन स्थिति में ब्रेक लगाने का समय मिल सके।
- रिफ्लेक्टर का प्रयोग: वाहनों के पीछे रिफ्लेक्टर या रेडियम टेप अवश्य लगाएं, ताकि पीछे से आ रहे अन्य चालकों को आपके वाहन की स्थिति का पता चल सके।
- आपातकालीन पार्किंग: यदि कोहरे के कारण वाहन सड़क किनारे खड़ा करना पड़े, तो इंडिकेटर चालू रखें और पार्किंग लाइट जलाकर रखें।
- मोड़ पर सावधानी: मुड़ने से काफी पहले ही इंडिकेटर दें, जिससे पीछे चल रहे वाहन के चालक को अपनी गति नियंत्रित करने का पर्याप्त समय मिल सके।
क्यों जरूरी है लो-बीम?
अक्सर चालक बेहतर रोशनी के लिए ‘हाई-बीम’ का उपयोग करते हैं, लेकिन कोहरे में यह उल्टा असर करता है। हाई-बीम की रोशनी कोहरे की बूंदों से टकराकर वापस आंखों पर आती है, जिससे सामने कुछ भी दिखाई नहीं देता। वहीं ‘लो-बीम’ की रोशनी सड़क की सतह पर पड़ती है, जिससे चालक को रास्ता देखने में आसानी होती है।
“हर सफर का हमसफर” के संकल्प के साथ बिहार सरकार ने सभी प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इन नियमों का पालन करें और सुरक्षित रहें।
जानकारी बनिए, सुरक्षित रहिए
